लखनऊ, 19 अक्टूबर 2025।
प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य श्री अवधेश कुमार वर्मा ने आज एक गंभीर मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि राज्य की सभी बिजली कंपनियां बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के इंडियन स्टैंडर्ड (आईएस) 16444 के स्मार्ट प्रीपेड मीटर नए कनेक्शन पर अनिवार्य रूप से लगा रही हैं और इसके एवज में ₹6016 की अवैध वसूली की जा रही है। यह कार्यवाही विद्युत नियामक आयोग के आदेशों का खुला उल्लंघन है।
श्री वर्मा ने बताया कि कल ही आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आईएस 16444 मीटर की कोई दर तय नहीं की गई है। ऐसे में जिस मीटर की दर ही निर्धारित नहीं है, उसकी किस्तों में वसूली की बात करना उपभोक्ताओं को गुमराह करने के समान है। उन्होंने कहा कि पावर कॉरपोरेशन पर पहले से ही विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत अवमानना की कार्रवाई चल रही है, इसलिए उसे मनमानी बंद कर नियामक ढांचे का पालन करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में जब कॉस्ट डाटा बुक बनाई गई थी, तब केवल आईएस 15884 (नॉन-प्रीपेड स्मार्ट मीटर) की दरें तय की गई थीं, जबकि आईएस 16444 (प्रीपेड स्मार्ट मीटर) की कोई दर अभी तक स्वीकृत नहीं है। इसके बावजूद नए कनेक्शन पर इन्हें जबरन लगाकर पैसे लेना पूर्णतः अवैध और उपभोक्ता विरोधी कदम है।
श्री वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत खरीदे गए स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की लागत का भुगतान केंद्र सरकार स्वयं कर रही है, और उन्हें उपभोक्ताओं को निःशुल्क उपलब्ध कराना अनिवार्य है। ये मीटर दरअसल पुराने पोस्टपेड मीटरों को बदलने के लिए खरीदे गए हैं, न कि नए कनेक्शन पर पैसे लेकर लगाने के लिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि महाराष्ट्र में एक स्मार्ट प्रीपेड मीटर की लागत केवल ₹2610 है, जबकि उत्तर प्रदेश में निजी कंपनियों को दिए गए टेंडर के अनुसार सिंगल फेज मीटर की वास्तविक लागत ₹2200 से ₹2300 के बीच है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से ₹6016 वसूलना पूरी तरह अनुचित और मनमानी है।
उन्होंने कहा कि यदि पावर कॉरपोरेशन वास्तव में इन मीटरों को नए कनेक्शन पर अनिवार्य करना चाहता है, तो उसे पहले विद्युत अधिनियम 2003 में संशोधन कराना होगा और नई दरों के निर्धारण के लिए पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनानी होगी।
श्री वर्मा ने स्पष्ट कहा कि विद्युत अधिनियम की धारा 47(5) के अनुसार, उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड का विकल्प चुनने का अधिकार है। बिना उपभोक्ता की सहमति के पोस्टपेड मीटर को गुपचुप तरीके से प्रीपेड में बदलना गैरकानूनी है।
उन्होंने अंत में चेतावनी दी कि यदि यह अवैध वसूली और उपभोक्ता शोषण जल्द नहीं रुका, तो राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद संविधानिक दायरे में रहकर कानूनी लड़ाई लड़ने को बाध्य होगी।