सर्पदंश से बचाव पर डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान की तीन कार्यशालाएं सफलतापूर्वक सम्पन्न

सर्पदंश से बचाव पर डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान की तीन कार्यशालाएं सफलतापूर्वक सम्पन्न

उत्तर प्रदेश में जागरूकता व रोकथाम के लिए बनी मजबूत रूपरेखा

लखनऊ, 28 जुलाई 2025:डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग ने फाउंडेशन फॉर पीपल-सेंट्रिक हेल्थ सिस्टम्स नई दिल्ली के सहयोग से उत्तर प्रदेश में सर्पदंश से बचाव और प्रबंधन पर केंद्रित तीन महत्वपूर्ण कार्यशालाओं का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में सर्पदंश के बढ़ते मामलों की गंभीरता को समझते हुए स्वास्थ्यकर्मियों, प्रशासन और मीडिया के बीच जागरूकता और समन्वय को सशक्त बनाना रहा। कार्यशालाओं में स्वास्थ्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक और मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा सर्पदंश से जुड़े चिकित्सा, नीतिगत और सामाजिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम में फाउंडेशन फॉर पीपल-सेंट्रिक हेल्थ सिस्टम्स के संस्थापक निदेशक और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने “सर्पदंश रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय रणनीतियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में हर साल लगभग 49,000 लोगों की मौत सर्पदंश के कारण होती है, जिनमें सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश से आते हैं। यदि समय पर एंटी-स्नेक वेनम सीरम उपलब्ध कराया जाए और मानकीकृत रेफरल प्रक्रिया अपनाई जाए तो इन मौतों को रोका जा सकता है। डॉ. लहरिया ने यह भी बताया कि समाज में व्याप्त भ्रांतियाँ और गलत प्राथमिक उपचार की जानकारी समय पर सही इलाज में बाधा बनती हैं।

राज्य नोडल अधिकारी (सर्पदंश) एवं डीजीएमएच के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज सक्सेना ने प्रदेश में सर्पदंश प्रबंधन से जुड़े हालिया प्रयासों और भविष्य की रणनीतियों को साझा किया। कार्यशाला में तीन प्रमुख वर्गों—सरकारी अधिकारी, चिकित्सक और मीडिया कर्मी—के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिनमें निगरानी तंत्र की मजबूती, चिकित्सकीय प्रोटोकॉल और जन-जागरूकता की भूमिका पर चर्चा हुई।

इन सत्रों का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह ने किया। विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) एस.डी. कंडपाल और आयोजन सचिव डॉ. मिली सेंगर ने पूरे कार्यक्रम का संचालन और समन्वय किया।
इस आयोजन ने उत्तर प्रदेश में सर्पदंश जैसी उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी से लड़ने के लिए एक ठोस और समन्वित ढांचा प्रस्तुत किया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विभागीय सहयोग और समुदाय-आधारित सहभागिता को केंद्र में रखते हुए इस पहल ने राज्य में सर्पदंश के रोकथाम व नियंत्रण की दिशा में एक नई शुरुआत की है। फाउंडेशन फॉर पीपल-सेंट्रिक हेल्थ सिस्टम्स और राम मनोहर लोहिया संस्थान भविष्य में अन्य प्रभावित जिलों में भी इसी तरह की कार्यशालाओं के आयोजन की योजना बना रहे हैं।