
लखनऊ, 17 मार्च। लखनऊ में इमाम हसन अलैहिस्सलाम की विलादत के मुबारक मौके पर एकता, मोहब्बत और इंसानियत का बेहतरीन मंज़र देखने को मिला। इस शानदार और रूहानियत से भरपूर तकरीब का पूरा एहतमाम समाजसेवी और एडवरटाइजमेंट जगत के मशहूर शख्सियत इजहार आब्दी ने किया।
इबादत और भाईचारे से रोशन हुई शाम
इस मुकद्दस महफिल का आगाज़ मौलाना मोहम्मद मियां आब्दी साहब की सरपरस्ती में नमाज-ए-जमात से हुआ, जिसके बाद रोज़ा इफ्तार का भी खास इंतजाम किया गया। इसमें मौलाना कल्बे जवाद, मौलाना जावेद हुसैन नजफी, मौलाना सैय्यद नेहाल समेत कई धर्मगुरु व अम्बर फाउंडेशन के संस्थापक वफ़ा अब्बास सहित हर मजहब और फिरके के लोगों ने शिरकत कर भाईचारे और इंसानियत की मिसाल पेश की।
शायरी की महफिल से महक उठी फिज़ा
इस मौके पर शहर के मशहूर शायरों ने इमाम हसन (अ.स) की शान में नात और मनकबत पेश की, जिससे महफिल रूहानियत और इश्क-ए-अहलेबैत (अ.स) की खुशबू से सरशार हो गई।
मौलाना कल्बे जवाद नकवी का असरदार ख़िताब
भारत की सुप्रीम रिलीजियस अथॉरिटी आफ्ताबे शरीयत मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नकवी ने इस मुबारक मौके पर गहरे इल्मी और जज्बाती लहजे में खिताब किया। उन्होंने इमाम हसन (अ.स) की सीरत, उनके सब्र, इस्लाही मकसद और इंसानियत के पैगाम को खूबसूरती से बयान किया। उन्होंने कहा कि इमाम हसन (अ.स) की जिंदगी मोहब्बत, अमन और इंसाफ की बेहतरीन मिसाल है, जिसे आज की दुनिया में अपनाने की जरूरत है।
आलीशान दस्तरख्वान – मोहब्बत और बराबरी का पैगाम
इस मुबारक जलसे को और भी खास बनाने के लिए इमाम हसन (अ.स) के आलीशान दस्तरख्वान का एहतमाम किया गया। इस बरकती दस्तरख्वान से गरीब-अमीर, हर मजहब और फिरके के लोग एक साथ बैठकर तबर्रुक हासिल करते नज़र आए, जिससे भाईचारे और मोहब्बत का शानदार मंज़र देखने को मिला।
मुमताज शख्सियतों की शिरकत
इस यादगार तकरीब में शहर की नामचीन हस्तियां, दानिश्वर, पत्रकार, उलेमा, कारोबारी और इंसानियत की खिदमत में लगी तंजीमों के मुखिया मौजूद रहे। सबने मिलकर एकता, मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम दिया।
इजहार आब्दी ने पेश किया शुक्रिया
इस एकता, मिलन और मोहब्बत की तकरीब को यादगार बनाने के लिए इजहार आब्दी ने इसमें शामिल होने वाले तमाम मेहमानों, उलेमा, दानिश्वरों, कारोबारियों, पत्रकारों और समाजसेवियों का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि इमाम हसन (अ.स) की सीरत हमें अमन, मोहब्बत और इंसाफ का सबक देती है, और इस तरह के जलसे समाज को जोड़ने और इंसानियत को बढ़ावा देने का बेहतरीन जरिया हैं।
रूहानियत से सरशार हुई महफिल
यह जलसा दुनियादारी से दूर, रूहानियत की खुशबू से मुअत्तर रहा। इसमें शामिल हर शख्स ने इमाम हसन (अ.स) की सीरत को अपनी जिंदगी में उतारने और समाज में मोहब्बत का पैगाम फैलाने का अहद किया।
लखनऊ की इस यादगार महफिल को हमेशा एक ऐसे जलसे के तौर पर याद रखा जाएगा, जिसने मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत की रोशनी फैलाई।