आम की फसल को कीट एवं व्याधि से बचायें-जिला उद्यान अधिकारी….

दिनांक 08 मार्च 2025 प्रतापगढ़। जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने बताया है कि आम के गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिये सम-सामयिक महत्व के कीट एवं रोगों का उचित समय प्रबन्धन नितान्त आवश्यक है, क्योकि बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था अत्यन्त ही संवेदनशील है। वर्तमान में आम की फसल को मुख्य रूप से भुनगा एवं मिज कीट तथा खर्रा रोग से क्षति पहुॅचने की सम्भावना रहती है। आम के बागो में भुनगा कीट कोमल पत्तियॉ एवं छोटे फलों के रस चूसकर हानि पहुॅचाते है। प्रभावित भाग सूखकर गिर जाता है साथ ही यह कीट मधु की तरह का पदार्थ भी विसर्जित करता है, जिससे पत्तियों पर काले रंग की फॅफूॅद जम जाती है,फलस्वरूप पत्तियों द्वारा हो रही प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बंद पड़ जाती है। इसी प्रकार से आम के बौर में लगने वाले मिज कीट मंजरियों एवं तुरन्त बने फलों तथा बाद में मुलायम कोपलो में अण्डे देती है जिसकी सूॅड़ी अन्दर ही अन्दर खाकर क्षति पहुॅचाती है, प्रभावित भाग काला पड़ कर सूख जाता है।उन्होने बताया है कि भुनगा एवं मिज कीट के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.1 प्रतिशत एसएल (2.0 मिली लीटर/लीटर पानी) या क्लोरपाइरीफास (1.5 प्रतिशत (2.0 मिली लीटर/लीटर पानी) की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। इसी प्रकार खर्रा रोग के प्रकोप से ग्रसित फल एवं डंठलों पर सफेद चूर्ण के समान फफूॅद की वृद्धि दिखाई देती है। प्रभावित भाग पीले पड़ जाते है तथा मंजरियॉ सूखने लगती है। इस रोग से बचाव हेतु ट्राइडोमार्फ 1.0 मिली0 लीटर या डायनोकेप 1.0 मिली0 ली/लीटर पानी की दर से भुनगा कीट के नियंत्रण हेतु प्रयोग किये जा रहे घोल के साथ मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। बागवानों को यह भी सलाह दी जाती है कि बागों में जब बौर पूर्ण रूप से खिला हो तो उस अवस्था में कम से कम रासायनिक दवाओं का छिड़काव किया जाये जिससे पर-परागण क्रिया प्रभावित न हो सके।उन्होने कीटनाशक के प्रयोग में बरती जाने वाली सावधानियों के सम्बन्ध में बताया है कि कीटनाशक के डिब्बों को बच्चो व जानवरों की पहुॅच से दूर रखना चाहिये। कीटनाशक का छिड़काव करते समय हाथो में दस्ताने, मुॅह को मास्क व ऑखों को चश्मा पहनकर ढक लेना चाहिये जिससे कीटनाशी त्वचा व ऑखों में न जाये। कीटनाशक का छिड़काव शाम के समय जब हवा का वेग अधिक न हो तब करना चाहिये अथवा हवा चलने की विपरीत दिशा में खड़े होकर करना चाहिये। कीटनाशक के खाली पाउच/डिब्बों को मिट्टी में दबा देना चाहिये।