संगम की पवित्र धरती पर बसे कलाग्राम के शानदार मंच पर गुरुवार को गीत, संगीत का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोला गुरुवारो लोक संगीत और सूफी गायकी की जादुई परंपरा को जीवंत करते हुए, मशहूर सूफी गायक लखविंदर वडाली ने अपनी यादगार प्रस्तुति दी। श्रोताओं के जोरदार तालियों के बीच मंच पर पहुंचें वडाली ने शिव और गंगा को प्रणाम करते हुए अपने सुरों की सरिता को प्रवाहित किया। उनके सुरों की मिठास और परफॉर्मेंस की गहराई ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत लाखविंदर वडाली ने “गंगा यमुना निर्मल पानी “से की। उनके गाए हुए गीत “शिव तेरी हू गई माई.. और “तू माने या ना माने…” सांसो की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया। उसके बाद “मेरा है भई मेरा है शंकर भोला है मेरा है, सारे जग में मचा दिया शोर भोला मेरा है” की प्रस्तुति देकर पूरे दर्शक दीर्घा को शिवमय कर दिया। वडाली के हर सुर और ताल पर श्रोता झूम उठे। वडाली के प्रसिद्ध भजन “मैं तो हो गई दीवानी तेरे नाम की” पर पंडाल में उपस्तिथ हजारों लोग नाचने पर मजबूर हो गए। लाइव बैंड की संगत ने संगीत को और प्रभावशाली बना दिया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कलाग्राम में आयोजित सांस्कृतिक कुंभ में लोकगीत और लोकनृत्यों की प्रस्तुति से दर्शक निहाल हो उठे। हर कोई इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का साक्षी बनना चाह रहा है। वही लोकनृत्यों की कड़ी में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के ग्यारहवें दिन विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने लोकनृत्यों के माध्यम से एक मंच पर सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया। जम्मू कश्मीर से आए खेमराज एवं दल द्वारा कुड नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों से खूब तालियां बटोरी। इसके बाद हिमाचल प्रदेश से आए प्रेम चन्द्र बाउली और साथी कलाकारों ने सिरमौर नाटी नृत्य, असम के बापू जी कनवार व दल द्वारा बिहू नृत्य की, सुरेन्द्र सिंह एवं दल ने हरियाणा के फाग नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों को खूब रोमांचित किया। कंवलजीत सिंह एवं साथी कलाकारों द्वारा झूमर नृत्य की प्रस्तुति दी। साथ ही नाटक समुद्र मंथन का भी मंचन हुआ।
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