प्रयागराज।टोले में अगर पंचलाइट ना आई होती तो गोधन और मुंगरी का प्रेम परवान नहीं चढ़ता। यह पंचलाइट की ही महिमा थी कि जिस प्रेम पर पंचायत में रोक लगाई थी उसी ने प्रेम की खुली छूट भी दी। गुरूवार को रुचीज़ इंस्टीट्यूट में माध्यम संस्थान (रंगमंडल) द्वारा संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के सहयोग से फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ की प्रसिद्ध कहानी पंचलाइट का भावपूर्ण मंचन किया गया। नाटक ग्रामीण अंचल का वास्तविक चित्र खींचता है और पाबंदियों के फलक पर प्रेम के प्रकाश को भी फैलाता है।कहानी यह है कि दूसरे गांव से आकर महतो टोले में रहने वाला गोधन टोले की लड़की मुनरी से प्रेम करता है, इसकी जानकारी पंचायत को हुई तो गोधन को समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। एक दिन महतो टोली के लोग मेले से पेट्रोमैक्स खरीद कर लाते हैं जिसे गाँव के लोग पंचलैट कहते हैं। दूसरे टोले के लोग जब पंचलाइट ना जलने पर महतो टोले के लोगों का उपहास करते हैं, तब मुनरी अपनी सहेली के माध्यम से पांचों से कहलवाती है कि गोधन को पंचलैट जालना आता है। गोधन को पांचलाइट जलाने के लिए बुलाया जाता है, वह पांचलाइट जलाता है। पंचायत उसे माफ कर देती है और प्रेम करने की छूट भी दे देती है।वरिष्ठ निर्देशक डॉ अशोक कुमार शुक्ल के निर्देशन में मंचित नाटक में कलाकारों ने बेजोड़ अभिनय से प्रस्तुति को सशक्त बनाया। कलाकारों में अमित यादव, सुधीर सिन्हा, अंशु श्रीवास्तव, दिव्या शुक्ला, शचीन्द्र शुक्ल, ओम श्रीवास्तव, निधि पांडेय, भूपेंद्र सिंह, विपिन कुमार गौड़, देवेंद्र कुमार और राकेश सिंह ने बेहतरीन अभिनय किया। सह निर्देशन व प्रकाश – विनय श्रीवास्तव, संगीत परिकल्पना – रिभु श्रीवास्तव, संगीत संचालन – संजू साहू, वस्त्र विन्यास – अंशु श्रीवास्तव, रूप सज्जा – संजय चौधरी, वीडियोग्राफी – रवि तिवारी ने किया।
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