कौशाम्बी | पश्चिम शरीरा थाना अंतर्गत पूरब शरीरा गांव स्थित अति प्राचीन मां झारखंडी मंदिर की अलौकिक कथा है यहां प्रतापगढ़ प्रयागराज चित्रकूट बांदा महोबा के लोग आकर माथा टेक कर अपनी मनौती करते है जहां क्षेत्रीय लोग मनौती पूर्ण होने के बाद गाजे बाजे के साथ परिक्रमा करते हुए लोग आते हैं मां झारखंडी की अलौकिक मूर्ति भी अपने आप में क्षेत्र गैर जनपद में ओला छवि रखती है मंदिर की मान्यता है कि जब भी नए जोड़ो की शादी होती है तो प्रथम पूजन झारखंडी मंदिर में पूजन के साथ होती है संतान की पूर्ति भी मां झारखंडी करती है मंदिर प्रांगण में हमेशा भंडारा भी आयोजित रहता हैमंदिर समिति की तरफ से हर दिन सुबह और शाम ढोल नगाड़ों के साथ भव्य आरती भी की जाती है इस दौरान आरती प्रमुख अवनीश द्विवेदी श्रीधर पांडे राघव पांडेय मलखान आदि दर्जनभर महिलाएं पुरुष मौजूद रहते हैं नवरात्रि के पर्व पर माता झारखंडी देवी का मंदिर कीर्तन भजन गूंज रहा है मां के पूजन अर्चन दर्शन को लेकर भक्तों की अपार भीड़ लग रही है सुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है।
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