जन-धन खाते मतलब समावेषी विकास की लाइफलाइन




प्रो0 एम0 के0 अग्रवाल
अध्यक्ष, अर्थषास्त्र विभाग, लखनऊ विष्वविद्यालय

यह एक विचित्र संयोग है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देष में समावेषी विकास की मजबूत आधारषिला रखी जा रही है। इसके लिए हर सार्थक पहल को यथोचित सम्बल व वेग पेदान करने की जरूरत होती है, जिसके लिए एक प्रेरक व कुषल प्रषासकीय ढंाचे को विकसित करने की आवष्यकता होती है। इन्हीं सब परिस्थितियों के विकास के द्वारा वंाछित लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। देष में लगातार होते विकास व राष्ट्रीय आय के बढ़ते अंाकडों के बीच एक ऐसे वर्ग की संख्या भी लगातार बढ़ रही थी जिसको इस विकास व राष्ट्रीय आय की बढ़त से लाभ नही हो रहा था। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की पहल लोगों के लिए व्यक्तिगत और राष्ट्र के लिए सम्पूर्ण स्तर पर एक प्रगतिषील कदम है। 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री ने देष में वित्तीय समावेष हेतु राष्ट्रीय मिषन ’प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ को दो चरणों में प्रारम्भ किया। इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक परिवार के लिए बैंक खता, वित्तीय साक्षरता, ऋण की उपलब्धता तथा इंष्योरेन्स व पेंषन आदि शामिल है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अन्तर्गत सामाजिक सुरक्षा के जिन महत्वपूर्ण योजना को शामिल किया गया है, यह हैंः प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंषन योजना तथा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना। यद्यपि यह सरकारी तौर पर घोषित कार्यक्रम है, किन्तु समय-समय पर सरकार इन खातों का इस्तेमाल खाता धारकों को कई अन्य तरह के लाभकारी योजनाओं से आच्छादित करती रहती है।




प्रधानमंत्री जन-धन खाता खोलने के लिए किसी प्रकार के प्रारम्भिक जमा राषि की आवष्यकता नही होती है। बाद में भी इसमें किसी प्रकार के न्यूनतम राषि रखने की बाध्यता नही होती है। प्रारम्भिक सफलता के बाद 28 अगस्त 2018 को इसमें कुछ संषोधन किया गया है। इसके अन्तर्गत प्रत्येक परिवार के स्थान पर अब प्रत्येक व्यस्क व्यक्ति का खाता इस योजना के तहत खोलना होगा। साथ ही कुछ अन्य महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए। अब जन-धन खाते की ओवर ड्राफट सुविधा रू0 5000 से बढ़ाकर रू0 10000 कर दी गई है। ओवर ड्राफट सुविधा के लिए आयु वर्ग 18-65 कर दिया गया। रू0 2000 के ओवर ड्राफट पर कोई शर्त लागू नही होगी। इसके अतिरिक्त 28/8/2018 के बाद खोले गए खाताधारकों के रूपे कार्ड धारकों की दुर्घटना बीमा राषि रू0 2 लाख से बढाकर 2 लाख कर दी गई है।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना को अपार सफलता प्राप्त हुई है। यह इस बात से स्पष्ट है कि 19/8/2020 तक 40.35 करोड जन-धन खाते खोले गए हैं जिनमें आधे से अधिक 22.29 करोड खाते महिलाओं के नाम पर खोले गए हैं। इससे यह पता चलता है कि महिलाओं को वित्तीय समावेषन तेजी से बढ़ा है। लगभग 30 करोड रूपे डेबिट कार्ड जारी किस गए हैं जो इस योजना की सफलता बताता है। 28/8/2014 से 19/8/2020 तक इन जन-धन खातों में रू 130701 करोड रूपये जमा किए गए हैं जो बताता है कि गरीब वर्ग भी बैकिंग का यदि लाभ ले रहा है तो वह बैकिंग प्रणाली को मजबूत भी कर रहा है। इससे अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में सहायता मिलती है। लोगों की सरकार पर निर्भरता कम होती है और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होते हैं। किसी भी सरकारी प्रयास का यह महत्वपूर्ण सफलता का पैमाना होता है।




यह बात इस तथ्य से स्पष्ट होती है कि पिछड़े राज्यों मेें प्रधानमंत्री जन-धन खातों की संख्या सबसे तेजी से बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर यदि देखें तो आन्ध्र प्रदेष की तुलना में आसाम में जन-धन खाता डेढ़ गुना से ज्यादा रहा है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेष में सर्वाधिक 6.8 करोड़ जन-धन खाते खोले गए। हरियाणा में मात्र 77 लाख खाते ही खोले गए। कुछ राज्यों में सक्रियता ज्यादा नजर नही आ रही यद्यपि वहॅंा पर सम्भावनाएॅं प्रबल प्रतीत हो रही हैं।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आज से छः वर्ष पूर्व वित्तीय समावेषन के माध्यम से गरीब वर्ग को आर्थिक मुख्य धारा में लाने के प्रयास में व्यापक सफलता मिलती हुई दिख रही है। यह वर्ग भी अपने को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कदम से कदम मिलता हुआ प्रतीत हो रहा है। यह प्रयास देष के सर्वांगीण व पोषणीय विकास के लिए मजबूत आधार स्तम्भ का कार्य करेगा। वर्तमान परिवेष में इस तरह के खाता धारकों और अधिक प्रेरित करने से उनकी आर्थिक स्थिति और बेहतर हो सकेगी।



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